Fri 19 Jun 2026
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डॉ. पल्लवी का प्रदर्शन और डॉ. आरएस पटेल की न्याय यात्रा : काशी क्षेत्र की 71 विधानसभा सीटों पर कुर्मी मतों के जरिए मोदी को घेरने की कोशिश

राजेश पटेल, मिर्जापुर। आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को उसके सबसे मजबूत गढ़ काशी प्रांत में ही घेरने की तैयारी विपक्ष के कुर्मी नेताओं ने शुरू कर दी है। इनमें एक हैं सिराथू की विधायक फायर ब्रांड नेता डॉ. सोनेलाल पटेल की बेटी डॉ. पल्लवी पटेल और दूसरे सरदार सेना के संस्थापक तथा जनहित संकल्प पार्टी के अध्यक्ष डॉ. आरएस पटेल। डॉ. पल्लवी पटेल ने NEET PAPER LEAK को मुद्दा बनाकर 15 जून को बीएचयू के सिंहद्वार पर गर्जना की तो डॉ. आरएस पटेल न्याय यात्रा के माध्यम से कुर्मी समाज को जगाने की मुहिम छेड़ दी है। इन दोनों नेताओं को अभूतपूर्व समर्थन भी मिल रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक प्रदेश काशी प्रांत में कुल 16 जिले आते हैं। इनमें 71 विधानसभा सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इनमें 42 सीटें जीती थीं। यानी आधी से 6 सीटें ज्यादा। गाजीपुर जिले में तो भारतीय जनता पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी इसी काशी प्रांत का हिस्सा है। हालांकि उनके संसदीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। वाराणसी मंडल के बनारस जिले में भाजपा और उसके सहयोगी दल ने 8, चंदौली में भाजपा ने तीन और सपा ने एक, जौनपुर में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 4 तथा सपा ने 5 सीटें जीती थीं। गाजीपुर में सभी सात सीटों पर समाजवादी पार्टी जीती थी।

डॉ. पल्लवी पटेल और डॉ. आरएस पटेल का संगठन कहने को तो मध्य तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर जिले में है, लेकिन मजबूती इसी काशी क्षेत्र में है। दोनों नेता जानते हैं कि विधानसभा चुनाव में उनकी-उनकी पार्टी को यदि कुछ हासिल हो भी सकता है तो पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश से ही। लिहाजा ये दोनों नेता अपने आंदोलन का केंद्र बिंदु पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश को ही बनाए हुए हैं।

डॉ. आरएस पटेल की पार्टी जनहित संकल्प पार्टी की न्याय यात्रा आजमगढ़ की कुर्मी बाहुल्य विधानसभा सगड़ी से गत दिनों शुरू हुई। इस यात्रा का जो प्रस्तावित कार्यक्रम है, उसके अनुसार सभी विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बाहुल्य हैं। इनकी न्याय यात्रा में कुर्मी युवा भारी संख्या में शामिल हो रहे हैं। इसका कारण भी है। प्रदेश में जहां-जहां कुर्मियों पर जातंकवादियों के हमले हुए हैं, सरदार सेना संस्थापक डॉ. आरएस पटेल अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे ही नहीं, वहां के पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर न्याय भी दिलवाया है। यही कारण है कि कुर्मी मतदाता अब कहने लगे हैं कि उनको ऐसा नेता मिल गया, जो शासन-प्रशासन की आंखों से आंख मिलाकर बात कर सकता है। न्याय के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रही बात डॉ. पल्लवी पटेल की तो उनके तेवर देख लोग उनको फायर ब्रांड नेता कहने लगे हैं। पुलिस प्रशासन को जिस तरह से चकमा देकर वह अपने गंतव्य तक पहुंच जा रही हैं, उससे साबित होता है कि वह दिखावे की राजनीति नहीं कर रही हैं। फतेहपुर में पुलिस की आंखों में धूल झोंककर बाइक पर सवार होकर पीड़ित परिवार के घर पहुंची थीं तो बनारस में प्रदर्शन के लिए जाते समय जौनपुर सीमा के पास पुलिस ने रोका तो मैजिक वाहन से एयरपोर्ट फिर वहां से बनारस अज्ञात स्थान पर पहुंच गईं। रात भर खोजबीन के बाद भी पुलिस पता नहीं लगा पाई कि वह बनारस में कहां पर रुकी हैं। सुबह भी नाकेबंदी की गई थी, लेकिन वह अचानक बीएचयू गेट पर प्रकट हो ही गईं। पुलिस के आला अधिकारी भी कहते सुने गए कि यह महिला किस मिट्टी से बनी है। हालांकि उनको तथा उनके समर्थकों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन जो बात कहनी थी, वह उन्होंने कह ही दिया। जो मैसेज देना था, दे ही दिया।

इन दोनों नेताओं की मुहिम यदि सफल होती है तो भाजपा को उसके काशी प्रांत में इस बार पिछली बार की अपेक्षा और कम सीटों पर समेटने में कामयाबी जरूर मिल सकती है। अंदरखाने तो यह भी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपना दल कमेरावादी और जनहित संकल्प पार्टी में समझौता भी हो सकता है। आपसी समझौता ही इनकी रणनीति की कामयाबी का मूल सूत्र है। क्योंकि कुर्मी मत यदि बंटे तो दोनों की मंशा धरी की धरी रह जाएगी।

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